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देश को शिक्षा वेवस्था क्यों है बर्बाद जाने ?

आज भारत के आज़ादी के लगभग 72 वर्ष होगए है लेकिन राष्ट्र की शिक्षा नीति में बहुत बदलाव आए है आज की शिक्षा परिषर में भाषा की महत्व होगया है लेकिन आज तक हमारे सरकारी स्कूलों की शिक्षा वही की वही रह गई है ।



राष्ट्रीय शिक्षा नीति

स्कूल:-
राष्ट्र की शिक्षा नीति आज की परिवेश में बहुत अच्छी है जो कि होनी भी चाहिए जैसे केंद्रीय विद्यालय , JNV , ARMY स्कूल को देख सकते है । केंद्रीय स्तर के विद्यालयों में विद्यार्थी की रुचि और सरकार द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों में छात्रों का सकारात्मक देख कर ये प्रतीक होता है कि कही राज्य की विद्यालयों से बेहतर है केंद्र द्वारा संचालित विद्यालय । लेकिन केंद्रीय विद्यालय में छात्रों को नामांकन कम ही हो पाता हूं क्यु की विद्यालयों की कमी और केंद्र सभी जगह पर अपना विद्यालय को ढंग से चलाने में असमर्थ होजाएगा । 
विश्वद्यालय
अभी ऊपर हमने केंद्र से संचालित हो रहे विद्यालय की इस्तिथि के बारे में जाना अभी जान लेते है केंद्र द्वारा संचालित की जाने वाली विभिन्न विश्वविद्यालयों के बारे में आप सभी लोग एक यूनिवर्सिटी को तो भली भांति जानते ही होंगे क्योंकि की ओ एक ऐसा विश्वद्यालय है  जहाँ की खबर हर जगह बना रहता है नाम है JNU  जी हॉ जवाहरलाल नेेहरु विश्वविद्यालय , BHU जैसे और कई विश्वविद्यालयों जो कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित होती है ऊनि इस्तिथि बहुत ही अच्छे है और सुचारू रूप से चलते है लेकिन हमारे सभी केन्द्रीय विश्वविद्यालय में इतना पर्याप्त मात्रा में सीट नही की सारे छात्रों का नामांकन होजाए इस लिए उसमे परीक्षा का आयोजन कर एडमिशन लिया जाता है ।

ये रही  केंद्र द्वारा संचालित UNIVERSITY और SCHOOL जो कि अच्छे वेवस्था के लिए जानी जाती है लेकिन अब बात करेंगे राज्य स्तरीय विद्यालय और विश्वविद्यालयों की बात ।

राज्यस्तरीय विद्यालय

राज्य स्तरीय विद्यालय का बात करे या ना करें ये समझ मे ही नही आरहा क्यू की इसकी बातें करने में थोड़ा हिचक रहा हूँ लेकिन जब बात करनी ही है तो कर लेते हैं राज्य द्वरा चलने वाली विद्यालय कुछ राज्य में तो बेहतर है लेकिन कुछ क्या ज्यादातर राज्य में तो उनकी होना या न होने के बराबर है क्योंकि उनकी इस्तिथ बद से बदतर होते ही जा रहा है  । बिहार की इस्तिथि तो और भी खराब है कुछ बातें जो बिहार सरकार विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति के लिए मध्यान भोजन का आयोजन किया लेकिन सरकार ये भूल गई कि छात्रों को ज्ञान की जरूरत है भोजन की खा कर ज्ञान नही मिलेगा । इसलिए आज के समय मे कोई भी अपने सरकारी स्कूलों में नामांकन कराने से डरते है लोग ।

राज्यस्तरीय विश्वविद्यालय

ऊपर बात किये हमलोग राज्यस्तरीय विद्यालय की बात जो भी बात राज्य स्तरीय विद्यालय की होइ उससे भी खराब हालत विश्वविद्यालय की है यहाँ पर न पढ़ाई  है न ही छात्र केवल डिग्री बाटने का कार्य कर रही है विश्वविद्यालय सभी राजयो में इसलिए सभी छात्र कोचिंग को ज्यादा तवाजु दे रहे है ।

 156 कुल दृश्य,  2 आज के दृश्य

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