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कैमुर में पॉकेट डायरी से पढेंगे और याद भी रखेंगे सरकारी स्कुल के बच्चे

ByG P Soni

Dec 17, 2021

कहा जाता है कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है लेकिन यह अविष्कार भी शिक्षा के बल पर ही संभव हो पाता है यदि समाज के हर वर्ग में शिक्षित लोगों की पैठ है तो परिवर्तन होना संभव है और अगर शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा हो तो सोने पर सुहागा हो जाता है जहां एक और बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति के लिए जाते थे वही नए कलेवर में और नए तौर-तरीकों से पढ़ाने वाले शिक्षकों की भरमार से बिहार की शिक्षा व्यवस्था में भी धीरे-धीरे ही सही जबरदस्त सुधार हो रहा है

कुदरा के शिक्षक सैयद जावेद हुसैन बधाई के पात्र हैं जिन्होंने पॉकेट डायरी नाम की नई खोज से बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि जगाने का एक नया अध्याय आरंभ किया है ज्ञात हो कि शुक्रवार को कुदरा के न्यू प्राथमिक विद्यालय बहुआरा में कुदरा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी पुष्पा कुमारी द्वारा सैयद जाबिर हुसैन प्रधानाध्यापक न्यू प्राथमिक विद्यालय बहुआरा के नवाचार “पॉकेट डायरी “का शुभारंभ किया गया !

पॉकेट डायरी नामक नवाचार बच्चों के लिए एक अलग तरह का नवाचार है ।कुदरा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी द्वारा यह बताया गया कि इस पॉकेट डायरी को पूरे प्रखंड स्तर पर लागू कराए जाने की कोशिश की जाएगी । यह बहुत ही अच्छा नवाचार है जिससे बच्चे अनुशासन एवं जिज्ञासा पूर्ण होकर पढ़ने की कोशिश करेंगे।

शिक्षक सैयद जाबिर हुसैन द्वारा बताया गया कि मेरे इस नवाचार से बच्चों में पढ़ने की प्रवृत्ति जागृत होगी ,कभी-कभी ऐसा देखा जाता है कि बच्चों को घर के कामों अर्थात खेत की रखवाली करने ,खलिहान की रखवाली करने में लगा दिया जाता है ।यह उनकी मजबूरी होती ,हालाकि ऐसा नहीं करना चाहिए ।

उस समय में बच्चों के हाथ में पॉकेट डायरी जो कागज के पन्नों द्वारा खुद से बनाई गई होती है ,उसमे उनके द्वारा लिखित गिनती, पहाड़ा ,शब्दार्थ या विद्यालय से मिला हुआ गृह कार्य को लिख कर उस डायरी का अध्ययन करने में इस्तेमाल कर सकते हैं ।अपने उस डायरी का सदुपयोग उस समय के लिए कारगर होता है ।

कभी कभी बच्चे एक से दो ,दो से तीन ,इसी तरह अगले वर्ग कक्ष में प्रोन्नत हो जाते हैं परंतु उनका बुनियादी ज्ञान कमजोर रहता है। तो वह उन तीसरी क्लास में आकर उन बेसिक चीजों को याद करने के लिए वह अपने पॉकेट डायरी में वह सारी चीजें लिखकर के याद कर सकते हैं और वह पॉकेट डायरी उन्हें यह भी एहसास दिलाएगा कि उन्हे अपना बेस मजबूत करना है ताकि मैं तीसरी वर्ग कक्ष के सापेक्ष वह बन सके ।

शिक्षा के क्षेत्र में यह बहुत ही सफल प्रयास है इस तरह से जिले में कई शिक्षक अपने नवाचारों का प्रयोग और इस्तेमाल प्रयोग कर रहे हैं ।जो शून्य निवेश पर आधारित है ।

उनके इस कार्य को प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी पुष्पा कुमारी द्वारा सराहना की गई। ईससे पुर्व मोहनिया के उत्क्रमित मध्य विद्यालय महरो के शिक्षक हरेन्द्र कुमार मिस्ड कॉल फॉर एजुकेशन को ईजाद कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं।

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