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कैमुर में दवाओं की कालाबाजारी से लुट रहे मरिज

ByG P Soni

May 16, 2021

कैमुर:. जिस तरह से आम लोगों की थोडी लापरवाही पर कोविड-19 अपने सबसे भयानक रूप में लोगों की ईह लीला समाप्त कर रहा है, वहीं सरकार और प्रशासन पूरे जी-जान से इस महामारी को रोकने के उपाय में लगे हुए हैं। वैक्सीन से लेकर सैनिटाइजेशन तक, जागरूकता कार्यक्रम से लेकर घरों से निकलने की पाबंदियों तक सब कुछ किया जा रहा है।

लेकिन फिर भी महामारी अपने रौद्र रूप में है वहीं टायफाईड मलेरिया और खांसी जुकाम जैसे रोगों ने भी पैर पसारना शुरु कर दिये हैं।और इसमें भी यह की कुछ इंसान की खाल में छुपे भेड़िए इस महामारी में अपने व्यवसाय और अपनी आमदनी चमकाने की जुगत में लगे पड़े हैं जहां एक और समाज के कई वर्ग के लोग छोटी-छोटी मदद करके एक-दूसरे को इस महामारी से उबरने में मदद कर रहे हैं वही कई ऐसे हैं जो आपदा में अवसर तलाश कर अपना धंधा चमकाने में लगे हैं साथ ही कम समय में बहुत ज्यादा मुनाफा कमाने की जुगत बिठा रहे हैं जी हां हम बात कर रहे हैं कैमूर के कुछेक दवा की दुकानों की, जो इस महामारी में जरूरतमंद लोगों की मदद करने के बजाय मुनाफा बटोरने में लगे हुए हैं

जिससे गरीब तबके के आदमी की जेब तो हल्की हो ही रही है साथ ही साथ आम आदमी के सेहत और आर्थिक स्थिति पर भी काफी गहरा प्रभाव पड़ रहा है कैमूर के कुछ दवा की दुकानों पर मुनाफाखोरी इतनी प्रबल है कि कोविड-19 में रामबाण का काम करने वाली विटामिन सी की गोलियां 60 से 80 रुपये तक में बेची जा रही हैं वही एंटीबायोटिक Azithromycin टेबलेट का तो मार्केट में काफी शॉर्टेज चल रहा है लेकिन कई दवा की दुकानों पर इसे ऊंचे भाव में बेचा जा रहा है इसके अलावा आईवरमाइंस्टीन की दवा तो दिख ही नही रही है,

मोनोसेफ इंजेक्शन भी काफी कशमकश के बाद मिल रही है, मल्टीविटामिन दवाओं की भी जबरदस्त शॉर्टेज चल रही है वही कई सस्ती और अच्छी विटामिन की दवायें मार्केट से गायब ही हो गयी हैं और उनकी जगह ईम्युन सिस्टम बढाने का खोखला दावा करने वाली महंगी दवाओं ने ले ली है और कैल्शियम की ऊंचे एमआरपी की जेनेरिक दवाएं तो लोगों को लुटने के लिये जैसे मार्केट में अटी पड़ी हैं

ऐसे में एक गरीब तबके का आदमी यदि संक्रमण से पीड़ित हो भी जाता है तो इन दवाओं की खरीद पर उसकी जेब पर काफी तगड़ी चोट पड़ती है जिले का स्वास्थ्य महकमा कुंभकरण की नींद सोया हुआ है इसके अलावा प्रधानमंत्री जन आरोग्य जैसी किफायती दवा की दुकानों पर भी ऊंचे दाम की प्रिंट की हुई जेनेरिक दवाएं मरीजों को एमआरपी पर दी जा रही हैं जिसकी वजह से इन्हें मोटी कमाई हो रही है

लेकिन गरीब मरीजों की आर्थिक हालत काफी खस्ता हो रही है जिस पर जिले के स्वास्थ्य महकमे को ध्यान देने की जरूरत है।

खामोश दुनिया ऐसे लोगों से विनती करता है कि इस संकट के काल में मानवता का परिचय दें एवं जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके सस्ती और अच्छी दवाएं लोगों को उपलब्ध करा कर उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ने से बचाएं। लॉकडाउन ने पहले ही समाज के उच्च से लेकर निम्न तबके की कमर तोड़ रखी है यदी किसी घर में कोई बीमार पड़ा हो तो उस घर के मुखिया से उसकी मजबूरी का फायदा ना उठाएं और एक महान देश के सच्चे नागरिक होने का परिचय देते हुए मानवता का साथ दें।

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