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80 साल के बुजुर्ग की दहाड़ से कांपते थे अंग्रेज, विजय दिवस पर जानें अनसुनी कहानी

ByG P Soni

Apr 23, 2021

आरा: 80 साल के एक बुजुर्ग की दहाड़ से अंग्रेजी हुकूमत कांप जाती थी। अंग्रेजी हुकूमत को इनसे जंग में कई बार मुंह की खानी पाड़ी है। हम बाद कर रहे हैं वीर बांकुड़ा बाबू कुंवर सिंह की है। 23 अप्रैल को अग्रेजों पर फतह हासिल करने के लिए विजय दिवस मनाया जाता है। एनबीटी ऑनलाइन विजयोत्सव पर आपके लिए वीर कुंवर सिंह की वीरता की अनसुनी कहानी लेकर आया है।

1857 विद्रोह के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ कई लड़ाई लड़ी थी। 80 साल के बुजुर्ग के जोश के आगे अंग्रेजों को कई बार मुंह की खानी पड़ी है। कहा जाता है कि भारत में शायद अंग्रेजों को इतनी बार हार का सामना करना पड़ा हो। प्रसिद्ध इतिहासकार पंडित सुंदर लाल ने उनके बारे में लिखा है कि जगदीशपुर का राजा कुंवर सिंह आसपास के इलाके में अत्यंत सर्वप्रिय थे, उस वक्त बाबू कुंवर सिंह की आयु उस समय 80 साल से ऊपर थी। फिर भी कुंवर सिंह बिहार के क्रांतिकारियों के प्रमुख नेता और 57 के सबसे ज्वलंत व्यक्तियों में से एक थे।

कुंवर सिंह ने किया नेतृत्व
जुलाई, 1857 में पटना में क्रांतिकारियों के नेता पीर अली को अंग्रेजों ने फांसी दे दी। पीर अली की मृत्यु के बाद 25 जुलाई को दानापुर के देशी पलटनों ने स्वाधीनता का ऐलान कर दिया। ये पलटनें जगदीशपुर भोजपुर की ओर बढ़ीं। कुंवर सिंह ने तुरंत अपने महल से निकल कर शस्त्र उठा कर इस सेना का नेतृत्व किया। कुंवर सिंह इस सेना के साथ आरा पहुंचे। आरा स्थित अंग्रेजी खजाने पर कब्जा कर लिया गया। जेल से कैदियों को रिहा कर दिया गया। अंग्रेजी दफ्तरों को गिरा दिया गया। इस विद्रोही जमात ने आरा के किले को घेर लिया। किले के अंदर थोड़े से अंग्रेज और सिख सिपाही थे। आरा के निकट एक आम का बाग था। कुंवर सिंह ने अपने कुछ आदमी आम के वृक्षों की टहनियों में छिपा रखे थे।

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