• Tue. Oct 20th, 2020

इतिहास

HISTORY RELATED

  • Home
  • पहला मतदान, पहली दरार, पहली भीड़: बिहार 1952 , जाने कैसा हुआ था बिहार का पहला चुनाव?

पहला मतदान, पहली दरार, पहली भीड़: बिहार 1952 , जाने कैसा हुआ था बिहार का पहला चुनाव?

पटना: जैसा की बिहार एक महामारी के बीच में चुनाव की तैयारी कर रहा है, खेल के नियम, मतदान से लेकर मतदान तक, फिर से लिखे जा रहे हैं, राज्य…

इस किले की दीवार से निकलता था खून, रात को आती थी रोने की आवाज

सासाराम:  बिहार के रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है रोहतास गढ़ का किला। कहा जाता है कि सोन नदी के बहाव वाली दिशा…

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को उनकी 5 वीं पुण्यतिथि पर DRDO और ISRO में योगदान को याद किया गया।

मुख्य विचार डॉ. कलाम एक महान वैज्ञानिक, राजनीतिज्ञ और शिक्षक थे उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म भूषण, पद्म विभूषण और भारत रत्न से सम्मानित किया गया था NEW…

Bal Gangadhar Tilak: स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, हम इसे लेकर रहेंगे, जानें महान नेता के लोकमान्य बनने की कहानी

आज हम भारत में जिस परिवेश में जिस रहे हैं, उसके पीछे एक नारे का काफी महत्व है- स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूंगा. जी हां,…

Chandrashekhar Azad: क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का नाम बहादुरी, राष्ट्रभक्ति और बलिदान का पर्याय

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक कहे जाने वाले शहीद चंद्रशेखर आजाद की आज जयंती मनाई जा रही है। महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद जी का नाम बहादुरी, राष्ट्रभक्ति और बलिदान का…

‘भारत के दो महान सपूत’: पीएम मोदी, अमित शाह और अन्य लोगों ने चंद्रशेखर आज़ाद और लोकमान्य तिलक को उनकी जयंती पर याद किया

आज (23 जुलाई) को दो भारतीय क्रांतिकारियों – चंद्रशेखर आज़ाद और लोकमान्य तिलक की जन्मशती मनाई जाती है। आइए संक्षेप में उनके महान जीवन के बारे में जानें: चंद्रशेखर आज़ाद…

ABVP के 72 साल, छात्रसंघ जहां अमित शाह, नड्डा, राजनाथ ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-समर्थित छात्र संगठन, जो लोकतांत्रिक दुनिया में सबसे बड़ा है, 9 जुलाई को  72 वीं वर्षगांठ है। भारतीय राजनीति पर इसके प्रभाव का…

सिंधिया की घर वापसी या फिर राजनीतिक विचार बदला , यहाँ जाने कब से है राजनीति में सिंधिया खानदान????

पंडित नेहरू ने ग्वालियर के महाराज जीवाजी राव सिंधिया से आग्रह किया कि वे कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़े मगर महाराज सिंधिया काफी हद तक हिन्दू महासभा को समर्थन…

1915 में मिल जाती आज़ादी , आज ग़ांधी के जगह कोई और होता “राष्ट्रपिता”

आजादी की लड़ाई का इतिहास लिखे जाने के वक्त नाइंसाफी का शिकार होने वालों में एक ऐसा क्रांतिकारी भी था,  जिसका प्लान अगर कामयाब हुआ होता, साथी ने गद्दारी नहीं…

चमार नहीं! चंवर वंश होता है!

चंवर क्षत्रियों का एक वंश! चमार तो मुग़लों का दिया गया नाम है! सूर्यवंशी चंवरवंश !! जैसे कि संत रविदास! चंवरवंशी क्षत्रियों का धर्म नष्ट करने के लिए मुगलों ने…