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कोरोना और अस्पृश्यता दो अलग चिजें : हरेन्द्र कुमार

ByG P Soni

Oct 30, 2020 ,

पिछले कई महीनों से जब से कोरोनावायरस देश में आया है तब से तकरीबन रोज ही नई-नई अफवाहें लोगों के सामने आ रही हैं जिसकी वजह से आम नागरिक सुरक्षा के उपाय और तरह-तरह की भ्रांतियों में पिस सा जा रहा है हाल ही में कुछ लोगों ने कोरोनावायरस की तुलना हिंदू अस्पृश्यता से कर दी जिसको लेकर दी बुद्धिस्ट-शेड्युल कास्ट मिशन ऑफ ईंडिया के राष्ट्रीय संयोजक सह बिहार प्रभारी हरेन्द्र कुमार अम्बेडकर ने कहा की कुछ लोग कोरोना की तुलना हिन्दू-अस्पृश्यता से करते हैं, लेकिन कोरोना वायरस और हिन्दू-अस्पृश्यता के वायरस के बीच एक बुनियादी अंतर है।

1) कोरोना वायरस सभी को प्रभावित कर रहा है, लेकिन हिन्दू-अस्पृश्यता का वायरस हर किसी को नहीं बल्कि विशिष्ट समुदाय को पिछले हजारों वर्षों से प्रभावित कर रहा है। इसलिए, हिन्दू-अस्पृश्यता से कोरोना-अस्पृश्यता की तुलना नहीं की जा सकती।

2) कोरोना वायरस एक साधारण प्रयोगशाला में बनाया गया है,लेकिन हिन्दू-अस्पृश्यता का वायरस हिन्दू धर्म शास्त्रों की विशेष प्रयोगशाला में विशिष्ट समुदाय को सामने रखकर, सोच-समझकर बनाया गया है।

3) कोरोना वायरस मानव संक्रमण के माध्यम से पूरी दुनिया में फैल गया है, लेकिन हिन्दू-अस्पृश्यता का वायरस विशिष्ट समुदाय से संबंधित व्यक्तियों को जैसे एक-एक को पकड़-पकड़कर उनके शरीर में इंजेक्ट किया गया हो ऐसे लगता है।

4) हिन्दू-अस्पृश्यता के वायरस की विशेषता यह है कि यह संक्रामक नहीं है, यह स्पर्श या वायु द्वारा दूसरें समुदाय को संक्रमित नहीं करता है,लेकिन यह आनुवंशिक है। यही कारण है की, हिन्दू-अस्पृश्यता के वायरस से बाधित व्यक्ति के पेट से हिन्दू-अस्पृश्यता का वायरस लेकर ही बच्चे पैदा होते हैं।

समाधान

1) दुनिया भर के वैज्ञानिकों के द्वारा कोरोना वायरस पर टीका बनाने के लिए शोध कार्य जारी है। कोई कारगर वैक्सीन प्राप्त होते ही कोरोना वायरस उन्मूलन निश्चित है। हिन्दू-अस्पृश्यता के वायरस पर बहुत पहले से ही ‘बौद्ध धम्म’ के रूप में कारगर वैक्सीन उपलब्ध थी,लेकिन उसे पहचानने वाला जानकार व्यक्ति अछूतों में कोई नहीं था।

14 अक्टूबर, 1956 को बाबासाहेब डॉ.अम्बेडकर नें हिन्दू-अस्पृश्यता के वायरस पर ‘बौद्ध धम्म’ के रूप में टीका उपलब्ध तो करा दिया, लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण वह टीका सभी अछूतों को नहीं लगाया जा सका। 3 जून, 1990 को जब कानूनी बाधा समाप्त की गयी,तो अब अछूतों का बहानें बनाना जारी है। कहने का मतलब यह है कि, यदि कुछ अछूत जातियों के लोग बहाने बनाकर हिन्दू बने रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं और खुशी-खुशी हिन्दू बनकर रह सकते हैं, लेकिन उन्हें हिन्दू-अस्पृश्यता के वायरस से संक्रमित बच्चों को जन्म देना बंद कर देना चाहिए। उनके ऐसा करने से हिंदू-अस्पृश्यता का वायरस भी उनकी पीढ़ी के साथ-साथ समाप्त हो जाएगा।

2) हिन्दू-अस्पृश्यता के वायरस के साथ पैदा हुए प्रत्येक अछूत व्यक्ति को उसके जन्म के साथ ही ‘बौद्ध धम्म’ रूपी टिका जब तक नहीं लगाया जाता,तब तक हिन्दू-अस्पृश्यता के वायरस का उन्मूलन असंभव है।

संक्षेप में:- हिन्दू-अस्पृश्यता के वायरस का उन्मूलन करने के लिए,हर एक अछूत व्यक्ति को उसके जन्म के साथ ही ‘बौद्ध धम्म’ रूपी टीका लगाया जाना अनिवार्य है। इसका दूसरा कोई विकल्प नहीं है।

Concept :- Those who belong to Scheduled Castes, they are bound to become BUDDHIST.

This is the only concept to unite around 1208 Scheduled Castes and their total around 25 crores in India into one separate religious BUDDHIST UMBRELLA.()
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भारतीय जनगणना – 2021

धर्म – बौद्ध( Buddhist)
जाति – चमार, महार, दुसाध, पासी, धोबी, भंगी, डोम, मुसहर…आदि लिखिए!

अब की बार,
धर्म बौद्ध लिखेंगे,
दस करोड़ चमार..

1 ) पहली पीढ़ी में सिर्फ लिखेंगे !
2 ) दूसरी पीढ़ी में सीखेंगे !
3 ) तीसरी पीढ़ी सही मायने में बुद्धिस्ट पहचान हासिल कर पाएगी!

नोट: ये लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं, किसी भी प्रकार के सहमति असहमति की स्थिति में लेखक ईसके स्वयं जिम्मेवार होंगे। ख़ामोश दुनिया टीम से इस विचार का कोई लेना नही हैं , उनको विचारों को रखना हमारी कर्तव्य के साथ साथ समाज को सत्यता बताना ही हमारा धर्म हैं ।

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