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ऐतिहासिक बिहार चुनाव में मिलेंगे कई चौंकाने वाले आंकड़े:प्रभाकर चतुर्वेदी

लोकडॉन के बाद पूरे विश्व का प्रथम चुनाव अपने बिहार में हो रहा है जिसे लेकर पूरे विश्व की निगाहें इस ओर टिकी हुई हैं इसी बात को सामाजिक कार्यकर्ता प्रभाकर चतुर्वेदी ने बड़े शानदार ढंग से बताते हुए कहा कि इतिहास लोकतंत्र का प्रथम प्रयोगशाला प्राचीन बिहार को ही मानता है

और कोरोनावायरस दौरान संपन्न हो रहे बिहार चुनाव उसी विरासत को और आगे ले जाने की एक कोशिश होगी भारतीय चुनावों पर जाती पैसा खरीद-फरोख्त पैसा बाहुबल आदि हावी होने की बात होती रही है,

पर हाल के अनेक चुनावों ने ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों से ऐसे तत्वों के बेअसर होने का मजबूत संकेत दिया है लोकसभा के 2014 और 2019 चुनाव इस बात को मजबूत साक्ष्य हैं

कोरोना काल के दोरान हो रहा बिहार चुनाव इस बार कोरोनावायरस पर जरूर ही भारी पड़ रहा है जैसा हमने पहले चरण में देखा विभिन्न विकास के मानकों पर पिछड़ा हुआ बिहारी मानस इन चुनावों में कोरोनावायरस से हुए लॉकडाउन की परेशानियों का हिसाब किताब जरूर मांग रहा है।

पिछले चुनाव के मुद्दे स्वास्थ्य रोजगार शिक्षा सुशासन अब और अधिक स्पष्ट और बड़े समेकित बिंदुओं के साथ उभरे हुए हैं उन के दौरान महाराष्ट्र गुजरात दिल्ली और दूसरे राज्यों से कष्ट दाई पलायन निश्चित ही बिहार का श्रमिक वर्ग भूला नहीं होगा और जवाब सरकारी प्रयासों और व्यवस्थाओं का भी लिया जाएगा।

सोशल मीडिया पर अनेकों ऐसे वाद संवाद और विवाद घटनाएं सामने आ रही है निश्चित तौर पर कोरोनावायरस थी ओ के दौरान जनता अपने प्रतिनिधियों से अधिक व्यापक रूप से जुड़ना चाहती है और इसी नजाकत को जो समझ जाएगा वह जनता का बहुमूल्य जनादेश ले जाएगा बिहार में जहां से सड़क बिजली पानी की योजनाएं आ रही है

वहीं विपक्ष बढ़ते अपराध स्वास्थ्य सेवाओं की जर्जर हालत बेरोजगारी पलायन जैसे मुद्दों पर धारदार बना हुआ है ध्यान देने वाली बात यह है कि पहले चरण की पोलिंग प्रतिशत बिहार चुनाव इतिहास में 90 के दशक के सर्वोत्तम चढ़ाते हैं

कुछ अपनों को छोड़ दें तो पहले चरण के चुनाव का पोलिंग प्रतिशत लगभग 52% रहा है मतलब साफ है कि राजनीतिक पार्टियों के वादाखिलाफी और लीपापोती से जनता का मोहभंग हो चुका है बिहारी चुनाव के दो और चरण बाकी है भाग बाकी है यह देखना है कि जनता जनार्दन क्या चाहती है प्रभाकर चतुर्वेदी

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