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#Budget2019: मॉर्डनाइजेशन के बावजूद डिफेंस को मिला कम बजट

इस बार डिफेंस का बजट 3 लाख करोड़ के पार गया है और इसे जोर-शोर से वित्त मंत्री ने अपनी बजट स्पीच में भी बताया और संसद के बाहर बीजेपी नेता भी इसका जिक्र कर रहे हैं। लेकिन सेना में मॉर्डनाइजेशन प्लान पर काम चल रहा है इस हिसाब से बजट काफी कम है |

हाइलाइट्स

  1. भारतीय सेना, नेवी और एयरफोर्स में चल रहा है मॉर्डनाइजेशन प्लान पर काम
  2. इस बार 318931 करोड़ की बजट का किया गया है आवंटन
  3. सैलरी और रोजमर्रा की जरूरतों में खर्च किए जाएंगे 210682 करोड़ रुपए
  4. मार्डनाइजेशन और इससे जुड़ी चीजों में खर्च किए जाएंगे 108248 करोड़ रुपए

भारतीय सेना, नेवी और एयरफोर्स में मॉर्डनाइजेशन प्लान पर काम चल रहा है, लेकिन अंतरिम बजट में डिफेंस के खाते में जो आया है वह इस लिहाज से कम लगता है। इस बार डिफेंस का बजट 3 लाख करोड़ के पार गया है और इसे जोर-शोर से वित्त मंत्री ने अपनी बजट स्पीच में भी बताया और संसद के बाहर बीजेपी नेता भी इसका जिक्र कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने बजट स्पीच के दौरान सर्जिकल स्ट्राइक पर बनी फिल्म उरी का जिक्र किया और सदन में ‘हाउ इज द जोश’ के नारे भी लगे। पिछले साल के मुकाबले इस बार अंतरिम बजट में डिफेंस बजट में करीब 7 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई है।

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने बजट स्पीच में कहा कि 2019-20 में हमारा रक्षा बजट पहली बार तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक हो जाएगा। हमारी सीमाओं की रक्षा करने और उच्च कोटि की तैयारी बनाए रखने के लिए अगर जरूरी हुआ तो रक्षा बजट में और अधिक बढ़ोतरी की जाएगी। डिफेंस मिनिस्ट्री के मुताबिक पिछले साल बजट में 298418 करोड़ (संशोधित अनुमान) रुपए की तुलना में इस बार 318931 करोड़ का आवंटन किया गया है। इसमें 210682 करोड़ रुपए रेवेन्यू एक्सपेंडिचर हैं यानी यह सैलरी और रोजमर्रा की जरूरतों में खर्च किए जाएंगे, और 108248 करोड़ रुपए कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी 108248 करोड़ रुपए मार्डनाइजेशन और इससे जुड़ी चीजों में खर्च किए जाएंगे।

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘हमारे सैनिक बहुत ही कठिन परिस्थितियों में हमारी सीमाओं की रक्षा करते हैं। हमारा गर्व और सम्मान हमारे सैनिक हैं। हमने भी उनके सम्मान का ख्याल रखा। अपने चुनावी घोषणा पत्र में हमने वन रैंक वन पेंशन को लागू करने का वचन दिया था। पिछले 40 सालों से रुके हुए इस काम को हमने पूरा किया। सरकार ने रक्षा सेवा के सभी कर्मियों को मिलिटरी सर्विस पे (एमएसपी) और अधिक जोखिम वाली ड्यूटी पर तैनात नौसैनिकों और वायु सैनिकों को दिए जाने वाले विशेष भत्तों में पर्याप्त बढ़ोतरी की भी घोषणा की थी।’ 
हालांकि करीब एक महीने पहले ही केंद्र सरकार ने तीनों सेना में जेसीओ रैंक के ऑफिसर्स को अलग मिलिट्री सर्विस पे देने के प्रस्ताव को नामंजूर किया है। इससे करीब 1 लाख 10 हजार फौजियों की उम्मीद को झटका लगा। एमएसपी के तौर पर ऑफिसर्स को महीने में 15500 रुपए दिए जाते हैं और जेसीओ और जवान को 5500 रुपए। सेना का प्रपोजल था कि इसके तीन स्लैब किए जाएं- ऑफिसर्स, जेसीओ और जवान। जेसीओ की एमएसपी 10 हजार रुपए की जाए। रक्षा मंत्रालय भी इससे सहमत था लेकिन वित्त मंत्रालय ने इसे रिजेक्ट कर दिया। यह प्रपोजल लागू होने पर सालाना 610 करोड़ रुपए का खर्चा आता। हालांकि सेना की तरफ से फिर इस प्रपोजल को भेजा गया है और फिर से विचार करने की अपील की गई है।

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