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COVISHIELD vs COVAXIN: कौन है ज्‍यादा असरदार, किससे बनती हैं ज्‍यादा एंटीबॉडीज

COVISHIELD vs COVAXIN: देश में कोरोना वैक्‍सीनेशन प्रोग्राम चल रहा है. वैक्‍सीन को लेकर को लेकर लोगों के मन में एक सबसे आम सवाल यह है कि कौन-सी वैक्‍सीन ज्‍यादा काम करेगी. कोविशील्‍ड लगवानी चाहिए कोवैक्‍सीन? हाल ही में आई एक स्‍टडी में यह जानकारी सामने आई है कि कोविशील्ड, कोवैक्सीन के मुकाबले ज्यादा एंटीबॉडी प्रोड्यूस करती है. भारत में की गई इस स्टडी में डॉक्टर, नर्स और हेल्‍थकेयर वर्कर्स शामिल थे.

कोरोना वायरस वैक्सीन-इनडयूस्‍ड एंटीबॉडी टाइटर (COVAT) के शुरुआती अध्‍ययन के मुताबिक, जिन लोगों ने दोनों वैक्सीन में से किसी एक वैक्‍सीन की डोज ली हुई थी. उसमें पाया गया कि दोनों ही वैक्सीन प्रभावी है लेकिन कोविशील्ड का एंटीबॉडी रेट ज्यादा अच्छा है.

कोविशील्‍ड ने बनाई 86.6% एंटीबॉडी 

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविशील्ड की पहली डोज लेने के बाद शरीर में अच्छी एंटीबॉडी बनती है. कोवैक्सीन की तुलना में कोविशील्ड लगवाने वालों में अधिक एंटीबॉडी डेवलप होती दिखाई देती है.

स्टडी बताती है कि कोविशील्ड लगवाने वालों में 86.8 फीसदी एंटीबॉडी और कोवैक्सीन लगवाने वालों में 43.8 फीसादी एंटीबॉडी डेवलप हुई है. स्टडी में उन स्वास्थ्य कर्मियों को शामिल किया गया है जिन्होंने कोविशील्ड और कोवैक्सीन की पहली या दोनों डोज लगवा ली थीं.

552 हेल्‍थवर्कर्स पर स्‍टडी 

स्टडी में बताया गया है कि 552 हेल्‍थवर्कर्स (325 पुरुष, 220 महिला) में से,  456 ने कोविशील्ड की पहली डोज ली थी और 86 ने कोवैक्सीन की पहली डोज ली थी. जिससे सबके शरीर में एंटीबॉडी डेवलप हो चुकी थी. कुल 79.3 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी डेवलप हुई है. स्टडी के नतीजों के मुताबिक दोनों वैक्सीन कोरोना वायरस पर प्रभावी हैं.

भारत में फिलहाल तीन कोविड -19 वैक्सीन  भारत बायोटेक की कोवैक्सीन, एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड और रूस की स्पुतनिक वी है. कोवैक्सीन और कोविशील्ड का प्रोडक्‍शन भारत में हो रहा है. स्‍पूतनिक का भी शुरू हो गया है. स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के मुताबिक, अबतक 23.27 करोड़ वैक्‍सीन डोज लगाई जा चुकी है

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