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राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2020: इतिहास, दिन का महत्व

भारत में हर साल 11 नवंबर, 2020 को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती के रूप में मनाया जाता है।

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने 1947 से 1958 तक पंडित जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में शिक्षा मंत्री के रूप में देश की सेवा की।

शिक्षा दिवस: मौलाना अब्दुल आज़ाद कौन थे?

एक सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद केवल एक विद्वान नहीं थे, बल्कि शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध थे।

मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे। उन्होंने 15 अगस्त, 1947 से 2 फरवरी, 1958 तक देश की सेवा की।

शिक्षा दिवस: मानव संसाधन विकास मंत्रालय की घोषणा

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 11 सितंबर, 2008 को घोषणा की, “मंत्रालय ने भारत में शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए भारत के इस महान बेटे के जन्मदिन को मनाने का निर्णय लिया है।”

एचआरडी मंत्रालय ने कहा, “2008 से 11 नवंबर तक राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाएगा, इसे हर साल छुट्टी घोषित किए बिना।”

शिक्षा दिवस का महत्व और उत्सव

स्कूलों में हर साल 11 नवंबर को विभिन्न रोचक और ज्ञानवर्धक संगोष्ठियों, संगोष्ठियों, निबंध-लेखन, रैलियों आदि का आयोजन करके मनाया जाता है। छात्र और शिक्षक साक्षरता के महत्व और शिक्षा के सभी पहलुओं पर राष्ट्र की प्रतिबद्धता के बारे में बात करने के लिए एक साथ आते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस भी मौलाना अब्दुल आज़ाद द्वारा स्वतंत्र भारत की शिक्षा प्रणाली के क्षेत्र में किए गए सभी महान योगदानों के लिए एक श्रद्धांजलि है।

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